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| Boasting! |
घमंड़! (Boasting!)
नमस्कार दोस्तों !
इस पोस्ट के माधयम से मैं इस लेख में इंसान को " घमंड " इतना क्यों होता हैँ! यह वर्णन करूँगा दोस्तों।
इस छोटी - सी ज़िंदगी में इंसान अपने आप पर इतना घमंड क्यों करता हैं!?
मैं अपनी साईट पर गया वहा पर बहुत देर तक बैठा रहा। कुछ देर बाद में चौकीदार आया मुझ से मिलकर बात चित करने लगा और बताने लगा कि पैसों की बहुत जरूरत है कब तक तनख्वाह मिल जाएगी। वह गरीब आदमी के आँखो से आंसू बहने लग रहे थे।
मैंने उसको बताया कि अपनी और से पूरी कोशिश कर रहा हूं और करता रहता हूं फिर भी कंपनी की तरफ से कोई रिप्लाई मेरे को नहीं आ रहा हैं। वेतन तो मिल जायेगा कहीं नहीं जाएगा, पर देरी हो रही है उसके लिए मैं आप से कुछ समय चाहता हूं ताकि मैं कुछ रास्ता निकाल सकूं?
मुझे बहुत पीड़ा हुई मुझ से रहा नहीं गया और मन में ख्याल आया कि क्यों ना इसको मैं अपने सीनियर सर का मोबाईल नंबर दे दू ताकि वह अपने दर्द को बयां कर सके बता सके कि सर मुझे पैसों की कितनी जरूरत है और कितनी देर लगेगी वेतन आने में यह उसे पता तो चल जायेगा!
मैंने उसे अपने सर का मोबाइल नंबर दे दिया कुछ देर के बाद उसने मोबाइल से बात करने की कोशिश की परंतु उसको ठीक से हिंदी में बात करते नहीं जम रहा था, तो अठ पटा सा रह गया।
फोन चालू था और उधर से रिप्लाई हो रहा था कि कौन बोल रहे हो, कहां से बोल रहे हो, क्या बोल रहे हो जैसे कि बहुत गुस्से में उस गरीब को बहुत डांट रहा हो और चिल्ला रहा हो कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे फोन करने की! और वह गरीब सिर्फ इतना ही बोल पाया कि सर मै चौकीदार बोल रहा हूं! वह गरीब ठीक से बात कर ही नहीं पाया और साहेब जी ने फोन कट कर दिया।
जिस इंसान को इंसान की कोई क़द्र ना हो वह कैसा इंसान हो सकता हैं!
क्या यह इंसानियत हैं एक इंसान से दूसरे इंसान से बात करने का क्या यह सही तरीका है?
फोन चालू था और उधर से रिप्लाई हो रहा था कि कौन बोल रहे हो, कहां से बोल रहे हो, क्या बोल रहे हो जैसे कि बहुत गुस्से में उस गरीब को बहुत डांट रहा हो और चिल्ला रहा हो कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे फोन करने की! और वह गरीब सिर्फ इतना ही बोल पाया कि सर मै चौकीदार बोल रहा हूं! वह गरीब ठीक से बात कर ही नहीं पाया और साहेब जी ने फोन कट कर दिया।
जिस इंसान को इंसान की कोई क़द्र ना हो वह कैसा इंसान हो सकता हैं!
क्या यह इंसानियत हैं एक इंसान से दूसरे इंसान से बात करने का क्या यह सही तरीका है?
क्या यह सब एक पढ़े लिखे आदमी को शोभा देता हैं,किसी गरीब से कैसे बात की जाय! बात करने का तरीका होता है! पहले समझ लो कि आगे वाला इन्सान क्या बोलना चाहता है, उसकी समस्या क्या हैं क्यों परेशांन वह इन्सान हैं,उस व्योक्ति को समझ लो फिर अपना प्रश्न करो ?
यह तरीका मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आया मुझे बहुत गलत लगा और अपने आप में मुझे शर्मिंदगी महसुस हुई।
एक बड़ा व्यक्ति बड़े पद पर विराजमान बड़े कंपनी का एक आईएनसी हेड क्या इस तरह के होते हैं। इस प्रकार के लोग किस बात पर, किस वजह से इतना घमंड करते है नहीं पता?
कुछ देर के पश्चात उस साहेब का मुझे फोन आया ( साहब लोगो का घुसा तो पूछो ही मत ) सारा गुस्सा मुझ पर ही निकल दिया। फोन पर खूब डांट मिली और बोला,चेतावनी भी दिया कि बिना पूछे मेरा नंबर तूने किसी ओर को कैसे दे दिया?
मेरे इजाजत के बिना नंबर कैसे दे सकते हो? इसी बात पर दो दो बातें हो गई और मैंने उनसे कहा कि मुझ से गलती हो गई। आगे ऐसी गलती नहीं करूंगा! शायद अपनी नजरिया से मुझे अपनी कोई गलत नहीं लग रही थी। लेकिन साहेब के लिए मानो बड़ी गलती मुझ से हो गई हों।
पता नहीं इंसान किस चीज पर इतना घमंड करता हैं जो इंसानियत ही भूल जाता हैं।
मेरे इजाजत के बिना नंबर कैसे दे सकते हो? इसी बात पर दो दो बातें हो गई और मैंने उनसे कहा कि मुझ से गलती हो गई। आगे ऐसी गलती नहीं करूंगा! शायद अपनी नजरिया से मुझे अपनी कोई गलत नहीं लग रही थी। लेकिन साहेब के लिए मानो बड़ी गलती मुझ से हो गई हों।
पता नहीं इंसान किस चीज पर इतना घमंड करता हैं जो इंसानियत ही भूल जाता हैं।
मेरा मकसत सिर्फ भलाई करने की थीं। ताकि किसी गरीब का भला हो सके।
इस कहानी में सिर्फ़ दो शब्दों का खेल था सिर्फ इतना ही बोल देते साहब की चिंता ना करो जल्द ही आप का वेतन भेज देंगे, सायद इतना सुनकर बेचारा गरीब बहुत खुश हो जाता?
कुछ बड़े लोग अपनी औक़ात भूल जाते है कि वह भी एक इंसान हैं कुछ भी साथ नहीं जाने वाला, सब इसी मिट्टी में मिल जाना है।
आज जो तुम्हारा हैं,कल किसी ओर का होगा। सब कुछ जानकर भी इंसान अनजान क्यों हैं! फ़िर भी इंसान बाज़ नहीं आता अपनी हरकतो से आईए दिन कोई ना कोई घमंडी इंसान कमजोर इंसान को निचा दिखाते रहता हैं।
इस धरती पर जिसने भी घमंड किया वह किसी ना किसी दिन इस धरती पर धूल खा कर गिर पड़ा हैं।
जीवन का सत्य यही है कि इस जहाँन में सब को एक समान जीने का अधिकार हैं, सभी के साथ वहीँ व्योहार करो जो सभी को ख़ुशी मिले।
इस कहानी में सिर्फ़ दो शब्दों का खेल था सिर्फ इतना ही बोल देते साहब की चिंता ना करो जल्द ही आप का वेतन भेज देंगे, सायद इतना सुनकर बेचारा गरीब बहुत खुश हो जाता?
कुछ बड़े लोग अपनी औक़ात भूल जाते है कि वह भी एक इंसान हैं कुछ भी साथ नहीं जाने वाला, सब इसी मिट्टी में मिल जाना है।
आज जो तुम्हारा हैं,कल किसी ओर का होगा। सब कुछ जानकर भी इंसान अनजान क्यों हैं! फ़िर भी इंसान बाज़ नहीं आता अपनी हरकतो से आईए दिन कोई ना कोई घमंडी इंसान कमजोर इंसान को निचा दिखाते रहता हैं।
इस धरती पर जिसने भी घमंड किया वह किसी ना किसी दिन इस धरती पर धूल खा कर गिर पड़ा हैं।
जीवन का सत्य यही है कि इस जहाँन में सब को एक समान जीने का अधिकार हैं, सभी के साथ वहीँ व्योहार करो जो सभी को ख़ुशी मिले।


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