एक नारी की ज़िंदगी!(Life of a woman!)
नमस्कार दोस्तों !
आज इस पोस्ट में बात होगी एक नारी के जिंदगी के बारे में जो बड़ी ही कठिन और जटिल होती हैं।
एक नारी का जीवन बड़ी ही मुश्किल और संघर्ष से जुड़ी होती हैं चाहे वह नारी " मां हो या पत्नी "
एक लड़की जो उस इंसान के बारे में कुछ भी नहीं जानती। फिर भी उस अंजान इंसान से सारी उम्र रिश्तों के बंधन में बंध जाती हैं।
ना ही वह अपनी पसंद रख पाती हैं ना ही उसे पूछने का अधिकार दिया जाता हैं। नारी अपनी इच्छाओं को मारकर जीने के लिए मजबुर हो जाती हैं।
आज की परिस्थितियों की बात कि जाय तो भी नारी का जीवन संघर्ष पूर्ण ही हैं।
एक पत्नी अपनी मां को संभाले या अपने बेटे को या उस आमदनी को संजोकर रखने में उसे काफ़ी संघर्ष करना पड़ता हैं।
आज की स्थिति ऐसी हो गई है कि परेशानिया कम होने का नाम नहीं लेती हैं!
घर में सभी लिए खाना तैयार करना बच्चे को स्कूल के लिए तैयार कराना अपनी मां को हॉस्पिटल लेे कर जाना फिर दुकान भी देखना ये सारा काम का बोझ लेकर चलना बड़ी चुनौती भरा मुश्किल का पल रहता हैं।
" ऊपर से पति का ना होना "
इतनी सारी परेशानियों में अगर पति का थोड़ा सा भी प्यार मिल जाय तो ज़िंदगी की थोड़ी तकलीब और परेशानी कुछ देर के लिए दूर हो जाती। लेकिन किसी किसी नारी के जीवन में वह भी सुख नहीं।
कभी कभी नारी अपना अस्तित्व को ही भूल जाती हैं उसे वह ज्ञात ही नहीं रहता की उसका भी कुछ जीवन हैं।
जो अपना जीवन जीना ही भूल जाती हैं।
किसी नारी का पति अगर उससे कहीं दूर हो तो उसकी मिलन की याद में एक दूसरे से मिलने के लिए बे सब्री से इंतज़ार करना और इस उम्मीद में रहना कि आएंगे कुछ वक्त साथ तो बिताएंगे लेकिन नसीब को तो कुछ और मंज़ूर होता हैं।
जब पति पास होता हैं तो रिश्तेदारों की लाईन लग जाती हैं ना ही प्यार करने का वक्त मिलता हैं ना ही दो शब्द प्यार के बोलने का मौका मिल पाता हैं!
समय के इस खेल में पति पत्नी की ऐसे हीं उम्र निकल जाती हैं।
यह बात तो सत्य हैं कि नारी शक्ति को समझना बहुत हीं जठिल हैं वो जिस रूप में भी होती हैं वह उस रूप में
अपनी अस्तित्व की रक्षा करना स्वयम जानती हैं।
अपनी अस्तित्व की रक्षा करना स्वयम जानती हैं।
ये नारी तेरी अद्भुभुत शक्तियों को नमस्कार।


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