मेरी अपनी ज़िंदगी!

13/02/2021

नमस्कार दोस्तों,

आज का विषय मेरे लिए बहुत ही खास हैं।
बहुत दिनों के बाद कुछ लिखने का समय मिला हैं।

घर,घर कहने मात्र से एक अपना सा लगता हैं और अनेकों मन में सपने देखने की कल्पना आरंभ हो जाता हैं।

एक शहर में एक अपना घर हो यह अधिकतर इंसान महशुस करता है। इस शहर में रोज़ी रोटी कपड़ा मिलने लगता हैं उस शहर में अगर अपना घर भी मिल जाए तो कितने नसीब की बात होती हैं।

जो सपना मैंने देखा था उसे आज पूरा होते देख लिया। चाहें वह लोन पर ही क्यों ना हो परन्तु एक घर का सपना साकार हुआ हैं।
आज घर की पूजा रखी थीं अपने जीवन में पहली बार वो भी एक शहर में अपनी हैसियत के अनुरुप मैंने कार्यक्रम किया जो शायद सामान्य रूप से एक निम्न स्तर के इंसान के लिए बहुत बड़ी बात हैं। किसी के लिए बड़ी बात रहे या ना रहे परंतु मेरे लिए बहुत बड़ी सबसे बड़ी बात हैं।

मैंने अपने काबलीयत के अनुसार बहुत बड़ा कार्य किया।आज के दिन मेरे मन में बैचैनी बहुत थीं डर लग रहा था कि कार्यक्रम कैसा रहेगा खाने का इंतज़ाम कैसे करू, मेरे बजट के अनुसार खाना खिलाना उचित नहीं लग रहा था फ़िर भी मन को बड़ा करके कार्य को अंजाम देने में सफल रहा।

घर कि सत्यनारायण भगवान की पूजा करने का सामर्थ मुझ में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन भगवान की असीम कृपा से पूजा का कार्यक्रम जो बनाया था वह शांति पूर्ण रूप से सही रहा।

मुझे किसी भी कार्य करने का तजुरबा नहीं था, मैं अन्दर ही अन्दर घबरा गया था। मेरे अपने घर के बड़े लोग परिवार से भी कोई सयोग प्राप्त नहीं हुआ। 

कहते हैं जो भी कार्य भगवान की मर्ज़ी से होता हैं वह सत्य अनुसार सही और सफल जरूर होता हैं।

जब घर में पंडित जी पधारे तो पूजा की तैयारी कुछ भी नहीं हो पाई थी। देर बहुत हो चुकीं थीं, पंडित जी ने जो सामग्री मंगवाई थीं वह सारी सामग्री पंडित जी के पास दे दिया।

घर की पूजा के काम में इतना व्यस्त हो गया की मुझे याद ही नही की मुझे भी तैयार होना हैं।

पंडित जी मुझ से कहने लगे कि पहले आप तैयारी तो अपनी कर लो क्यो कि आपको ही तो पूजा में बैठना हैं। 

मैं आनन फानन में तैयार हो गया और पूजा में बैठ गया। घर की सत्यनारायण पूजा करीबन दो से तीन घंटे चली होंगी। पूजा संपन्न होने को आई थी लेकिन भोजन बन के तैयार नहीं हुआ था। समय लग रहा था, मेरी चिंता बढ़ रही थीं कि जो भी मेहमान जान पहचान के लोग आये थे कई बिना खाना खाएं कई चले मत जाये।

इन सब व्योवस्था को संभालने के लिए मैं अकेला ही था कहने के लिए तो बहुत थे लेकिन सब डराने वाले थे।
घर की पूजा और भोजन का कार्यक्रम तो शांति पूर्ण सही रहा लेकिन खाना कम से कम 30 से 35 लोगो का बच गया था। जो मुझे ठीक नही लगा। खैर कार्यक्रम में ऐसा तो होता रहता हैं। 
मेरे मन में जो बैचनी थीं वह दूर हो गई जो कार्य संपन्न हुआ उसका श्रय भगवान को ही जाता हैं उसकी शक्ति और मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं होता।

जो कुछ भी शुभ कार्य होते हैं उन सभी कार्य को भगवान के आशीर्वाद से ही पूर्ण होते हैं। पूजा पाठ खाना भोजन का प्रबंध ये सब करने की मेरी कुछ हैसियत नहीं थीं। कैसे हुआ और मैंने कैसे किया मुझे समझ नहीं आया। बस हो गया। 

पहली बार का मेरे लिए बहुत बड़ा सा कार्यक्रम करना मुझे एक सपना जैसे ही लगा।
सभी को बुलाया, कुछ लोग याद रहें तो कुछ लोग छूट गए तो कुछ लोग नज़दीक हो कर भी ना आ सकें।


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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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