मेरी अपनी दिनचर्या!(My own routine!)
आज इस लेख में कल कि अपनी दिनचर्या के बारे में वर्णन करने का प्रयास किया हैं, दोस्तों!
मैं ने अपनी सुबह कि शुरवात बिस्तर से उठ कर कुछ देर पश्चात, थोड़े वक़्त के लिए ठहलने से की।
20 से 30 मिनट का योगा किया अतः कुछ अंतराल में स्नान करके प्रभु को नमस्कार करते हुए मैंने जलपान ग्रहण किया।
आज कुछ असमंजस में था कि किस ओर अपने कदमों को बढ़ाया जाए!
मुझे शुक्रवार को ही ऑफिस से एक टारगेट दिया गया था कि सोमवार को साईट सर्वे करना हैं।
मैं इसी दुविधा में था कि ऑफिस जाया जाए की साईट सर्वे किया जाए! समस्या यह थीं कि ऑफिस से साईट की दूरी काफ़ी हैं,और मेरे रूम से साईट कि दूरी कुछ ही अंतराल में हैं।
आज वैसे मुझे ऑफिस के लिए देरी भी बहुत हों चुकीं थीं, मन में एक सुझाव आया की क्यों ना पहले कस्टमर को फोन लगाकर पूछ लिया जाय कि आपकी साईट में सर्वे के लिए कितने समय पश्चात आ सकते हैं?
कस्टमर के बताए समय अनुसार मुझे करीबन एक से दो घंटे मिल गए।
मुझे थोड़ी राहत मिली की अब तो रूम से होते हुए ही साईट सर्वे के लिए निकल सकते हैं।
बस क्या था यह एक से दो घंटे कैसे निकल गए पता ही नहीं चला और कुछ देर बाद ही मौसम भी ख़राब होने लगा था।
मौसम ने अपना रंग बदलना शुरू कर दिया, मैं काफ़ी चिंतित हो उठा क्यों की कस्टमर के दिए हुए दो घंटे समाप्त हो गए थे।
इस बीच बारिश ने भी अपना समय एक से डेढ़ घंटे लगा दिया था।
मुझे रूम पर ही 3:30 बज चुके थे, मैं इस डर में परेशान हों रहा था कि कहीं लॉक डाउन के कारण मुझे साईट सर्वे की अनुमति नहीं मिलेगी,जब काम ही नहीं होगा तो आज कि रिपोर्ट ऑफिस में क्या जमा कर पाऊंगा?
मुझे थोड़ी राहत मिली की बारिश की गति धीमी हो गई, मैं जल्द से अपनी दो पहिया वाहन को निकाल कर साईट पहुंच गया।
जैसे ही मैं साईट गया वैसे ही गेट के पास मुझे वहीं कस्टमर मिल गया।
मैंने उनसे माफ़ी मांगी कि मुझे आने में देरी हो गई, परंतु वह हस के बोल दिए की कोई बात नहीं मैं बस निकलने वाला ही था... अच्छा हुआ आ गए।
मैंने जब उन्हें देरी से पहुंचने का कारण बताया तो वह मुझ पर ज़ोर से हसने लगा क्यों की दोस्तों उस जगह पर, उस एरिया में कोई बरसात ही नहीं हुईं थीं,ना ही एक बूंद पानी की गिरी हुईं थीं।
मुझे कस्टमर यह बोलकर कि आ गए हो तो अपना साईट सर्वे का काम कर लों, इतना बोलकर वह कस्टमर वहा से निकल गया।
मैंने अपना काम बड़े ही शांति पूर्ण किया और रिपोर्ट भी अपने अधिकारी को जमा कर दिया।
दोस्तों कभी कभी ऐसा समय आ जाता हैं कि कितनी भी अपनी सच्चाई की सफाई पेश कश कर दो, उस सच्चाई का कोई मूल्य नहीं होता, उसे एक बनी बनाईं कहानी समझ कर झूट ही समझते हैं।
मैं ने अपनी सुबह कि शुरवात बिस्तर से उठ कर कुछ देर पश्चात, थोड़े वक़्त के लिए ठहलने से की।
20 से 30 मिनट का योगा किया अतः कुछ अंतराल में स्नान करके प्रभु को नमस्कार करते हुए मैंने जलपान ग्रहण किया।
आज कुछ असमंजस में था कि किस ओर अपने कदमों को बढ़ाया जाए!
मुझे शुक्रवार को ही ऑफिस से एक टारगेट दिया गया था कि सोमवार को साईट सर्वे करना हैं।
मैं इसी दुविधा में था कि ऑफिस जाया जाए की साईट सर्वे किया जाए! समस्या यह थीं कि ऑफिस से साईट की दूरी काफ़ी हैं,और मेरे रूम से साईट कि दूरी कुछ ही अंतराल में हैं।
आज वैसे मुझे ऑफिस के लिए देरी भी बहुत हों चुकीं थीं, मन में एक सुझाव आया की क्यों ना पहले कस्टमर को फोन लगाकर पूछ लिया जाय कि आपकी साईट में सर्वे के लिए कितने समय पश्चात आ सकते हैं?
कस्टमर के बताए समय अनुसार मुझे करीबन एक से दो घंटे मिल गए।
मुझे थोड़ी राहत मिली की अब तो रूम से होते हुए ही साईट सर्वे के लिए निकल सकते हैं।
बस क्या था यह एक से दो घंटे कैसे निकल गए पता ही नहीं चला और कुछ देर बाद ही मौसम भी ख़राब होने लगा था।
मौसम ने अपना रंग बदलना शुरू कर दिया, मैं काफ़ी चिंतित हो उठा क्यों की कस्टमर के दिए हुए दो घंटे समाप्त हो गए थे।
इस बीच बारिश ने भी अपना समय एक से डेढ़ घंटे लगा दिया था।
मुझे रूम पर ही 3:30 बज चुके थे, मैं इस डर में परेशान हों रहा था कि कहीं लॉक डाउन के कारण मुझे साईट सर्वे की अनुमति नहीं मिलेगी,जब काम ही नहीं होगा तो आज कि रिपोर्ट ऑफिस में क्या जमा कर पाऊंगा?
मुझे थोड़ी राहत मिली की बारिश की गति धीमी हो गई, मैं जल्द से अपनी दो पहिया वाहन को निकाल कर साईट पहुंच गया।
जैसे ही मैं साईट गया वैसे ही गेट के पास मुझे वहीं कस्टमर मिल गया।
मैंने उनसे माफ़ी मांगी कि मुझे आने में देरी हो गई, परंतु वह हस के बोल दिए की कोई बात नहीं मैं बस निकलने वाला ही था... अच्छा हुआ आ गए।
मैंने जब उन्हें देरी से पहुंचने का कारण बताया तो वह मुझ पर ज़ोर से हसने लगा क्यों की दोस्तों उस जगह पर, उस एरिया में कोई बरसात ही नहीं हुईं थीं,ना ही एक बूंद पानी की गिरी हुईं थीं।
मुझे कस्टमर यह बोलकर कि आ गए हो तो अपना साईट सर्वे का काम कर लों, इतना बोलकर वह कस्टमर वहा से निकल गया।
मैंने अपना काम बड़े ही शांति पूर्ण किया और रिपोर्ट भी अपने अधिकारी को जमा कर दिया।
दोस्तों कभी कभी ऐसा समय आ जाता हैं कि कितनी भी अपनी सच्चाई की सफाई पेश कश कर दो, उस सच्चाई का कोई मूल्य नहीं होता, उसे एक बनी बनाईं कहानी समझ कर झूट ही समझते हैं।
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