ये ज़िंदगी क्यों इतना सब्र लेती हो, मेरे सब्र का बांध ना टूट जाएं ये ज़िंदगी!!
ज़िंदगी में परेशानियां ना हो तो ज़िंदगी जीने का तजुर्बा नहीं मिलेगा।
मनुष्य जीवन में परेशानियां सभी के ज़िंदगी में आती जाती हैं परंतु किसी किसी के हिस्से में बहुत ज्यादा तो किसी को कम मिलती हैं।
मेरे ज़िंदगी में ऐसा तूफ़ान लेकर आई हैं परेशानियां की जानें का नाम ही नहीं लेती।
जीवन में हम उन आनेवाली परेशानियों से कितने भी दूर भागने की कोशिश करले पर वह परेशानियां हमारा पीछा नहीं छोड़ती!
मैं और मेरी पत्नी (पिंकी) डायलिसिस से बचने के लिए मेरठ दिल्ली गए हिम्स आयुर्वेदिक हॉस्पिटल ताकि पिंकी अपनी परेशानियों से बच सकें, 15 दिन का इलाज़ ले कर आए लाख खर्च भी कर लिए फिर भी आज सामने ऐसी स्थिति आई की जिस परेशानी से बचना चाहते थे आख़िर वहीं हुआ जो नहीं होना था।
आज हम दोनों के लिए एक फैसला लेना बहुत ही कठीन हो रहा था की पिंकी का डायलिसिस कराए या ना कराए।
दिल की बैचेनी बड़ रहीं थीं, रो रो कर आंखे लाल हो गईं थीं, यह फैसला लेने में हमें बहुत दिक्कत आ रहीं थीं!
हमारे पास दूसरा रास्ता भी नहीं बचा था, पिंकी की तबियत को देखते हुए बिना देर किए मुझे अपना फैसला डॉक्टर को देना ही था।
आज पहला डायलिसिस आख़िर में देना पड़ा और पूरा दो घंटा चला।
इस जीवन में एक सवाल भगवान से ज़रूर करूंगा कि हे भगवन बीमारी तो दे दी, उसका निदान भी करवा दे गरीब आदमी इतनी बड़ी बीमारी के इलाज़ से कैसे लड़ पायेगा।
जो दिन रात अपने मजदूरी के लिए और घर का दाना पानी, पोषण का इताजम में उसका पूरा जीवन निकल जाता हैं भला इन बीमारियो से कैसे लड़ पायेगा।
ऐसा जीवन से बेहतर तो मौत ही सही हैं!
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