Marriage Anniversary !
नमस्कार दोस्तों!
आज इस लेख में, मैं अपनी शादी की सालगिरह के कुछ पल के बारे में बताने जा रहा हूँ।
मेरी शादी की सालगिरह २०/४/२०२० दिन सोमवार के दिन थीं।
इस दिन भी रोज कि तरह मेरी दिनचर्या वही थीं, सुबह 6:30 से 7:30 बजे जाग कर, बर्श करके। थोड़े देर के लिए व्याम कसरत करना।
मोबाईल द्वारा हम दोनों को ढेर सारी बधाईयों का सिलशिला शुरू था।
मोबाईल द्वारा हम दोनों को ढेर सारी बधाईयों का सिलशिला शुरू था।
हमारी शादी को नव वर्ष पूर्ण हुये इस बात से भी बहुत हीं ख़ुश थे हम दोनों और कुछ सरप्राईज का भी इंतज़ार था।
वक्त कैसे कैसे बित जाता हैं कुछ पता नहीं चलता,इसी बीच में हम दोनों को एक लड़का भी है। वह भी आठ वर्ष का हैं।
वक्त कैसे कैसे बित जाता हैं कुछ पता नहीं चलता,इसी बीच में हम दोनों को एक लड़का भी है। वह भी आठ वर्ष का हैं।
इस पल की ख़ुशी इसलिए थीं कि हम दोनों इस शादी की सालगिरह पर इन नव वर्ष के दरमियान आज तक साथ में सैलिब्रेड नहीं कर पाये।
इन नव वर्षो के अंतराल में किसी ना किसी काम से या किसी रिश्तेदारों के घर कार्यक्रम की वजह से हमने अपनी शादी की सालगिराह नहीं मना सके।
आज जब साथ में रहने का मौका मिला, अतः साथ में भी थे? लेकिन कोई भी दुकाने खुली नहीं थी केक के लिए,कम्बख्त समय का तकाजा देखो लॉकडाउन के वजह से सारी दुकाने बंद थी।
सायद दुकाने सुबह के वक्त खुली रही भी होगी, परन्तु यह मेरे दिमाग में रहा ही नहीं की दुकान से कोई केक खरीदना भी हैं!
सायद दुकाने सुबह के वक्त खुली रही भी होगी, परन्तु यह मेरे दिमाग में रहा ही नहीं की दुकान से कोई केक खरीदना भी हैं!
जब याद आई तो मैंने घड़ी कि और देखा तो शाम के 5:30 बज चुके थे।
मुझे कुछ भी याद नहीं रहा,जल्द बाज़ी में मै एटीएम गया कुछ पैसे निकाला,कुछ देर तक इस गली से उस गली कुछ दुकानों को खोजना शुरू किया परंतु कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
कुछ देर पश्चात मै घर वापस लौट आ गया, जैसे ही घर आया तो सवाल सुरु हों गए घुसा तो पूछो भी मत सातवें आसमान पर पहुंच गया था।
क्यों की मेडम को तो आज ही के दिन में पनीर और केक खानी थी?
मैं अपनी सफ़ई में कुछ बोल पता, इससे अच्छा लगा कि मैं शांत ही रहू।
क्यों की मेडम को तो आज ही के दिन में पनीर और केक खानी थी?
मैं अपनी सफ़ई में कुछ बोल पता, इससे अच्छा लगा कि मैं शांत ही रहू।
मैं अपने आप को शर्मिंदा महशुश कर रहा था कि इतने सालों के बाद तो बड़े दिनों के बाद में शादी की सालगिरह मनाने का मौका मिला था उसे गवा दिया!
परंतु यह भी सोच रहा था कि, क्या पनीर और केक इतना जरूरी हैं?
उस रात को हम दोनों में ठीक से कोई बात नहीं हो पाई और उस दिन का सुनेहरा मौका ओर समय हम दोनों ने खो दिया।
मैंने अपनी तरफ़ से खूब कोशिश की परंतु अपनी जीवन संगिनी को ठीक से समझा ना सका।
बस वह एक ही बात पर जोर दे रही थी कि मैंने पहले से ही जाकर पनीर और केक क्यों नहीं लाया।
मैं अपनी पत्नी को यह समझाने की कोशिश में था कि प्यार भरी ज़िन्दगी में पनीर ओर केक कुछ भी मायने नहीं रखते।
अभी के वक्त में यह ज़रूरी नहीं हैं कि हम केक काटे, ज़रूरी यह हैं कि इस वक्त में हम कैसे एक दूसरे को समझने कि कोशिश करें, इस महामारी के वक्त में कैसे ज़िंदगी जीने की छोटी छोटी काम की चीजे सीखे, जो बुरा वक्त आने पर हिमत से काम ले सके।
अगर किसी को कुछ नहीं दे सकते तो कम से कम उन लोगों के लिए दुआ करे जो इस मुश्किल वक्त में अपने परिवार से दूर है।
मुझे अपने जिंदगी में जीवन संगनी और जीवन साथी को कैसे खुश रखते है, यह शायद मुझे नहीं पता!
परंतु मेरा मानना यह हैं कि एक दूसरे को समझना, एक दूसरे को रहा दिखाना, एक दूसरे का ख़्याल रखना, एक दूसरे की इजत करना, समय आने पर एक दूसरे के लिए समर्पण की भावनाओं की कद्र करना।
परंतु मेरा मानना यह हैं कि एक दूसरे को समझना, एक दूसरे को रहा दिखाना, एक दूसरे का ख़्याल रखना, एक दूसरे की इजत करना, समय आने पर एक दूसरे के लिए समर्पण की भावनाओं की कद्र करना।
वैसे सच्ची बात तो यह हैं कि अगर पत्नी गुस्से में हो तो पति ने कुछ वक्त के लिए मौन धारण कर लेना चाहिए। अन्यथा गुस्से गुस्से में कुछ गलत हो सकता हैं।

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