मेरी ज़िंदगी में आज उन सबसे बड़ी गलतियों के बारे में चर्चा करने जा रहा हूं। जो सायद ही कुछ लोग करते होंगे। लेकिन कोई ना कोई अपने जीवन में उन गलतियों को कर ही देता हैं।
दोस्तों यह बात उन दिनों की हैं जब अपने देश में कोरोना का वक्त नहीं आया था।
एक साल पहले की कहानी हैं –
मेरे जीवन की नंबर एक गलती – शहर में अपना घर हो यह सपना देख कर यहां से मेरी गलतियों का आविष्कार की शुरवात हुईं।
यह एक सच्चाई हैं कि हर किसी का सपना होता हैं कि उसका भी एक सुंदर अपना घर हों वो भी एक शहर में!
दोस्तों, घर का यह सपना वो भी एक शहर में हमारे जैसे निम्न वर्ग वालों को भारी पड़ जाता हैं स्वप्न के दलदल में धंसते ही चले जाते हैं।
घर के स्वप्न को साकार करने के प्रयास में अपनी बनी बनाई ज़िंदगी को उझाड़ने में लग जाते हैं। जो भी बड़ी मेहनत से बनी बनाई पूंजी को अपना घर यह स्वप्न को अपना समझकर उसमें गवा बैठते हैं।
2. घर का सपना पूरा करने के लिए मैंने एक शहर में एक छोटा – सा ज़मीन का टुकड़ा खरीदने के लिए मैने ठान ली उसे पूरा करने के लिऐ दिन रात सोचने लगा।
मैं अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छे से जानता था। जेब में कोई रुपया नहीं था, ना ही घर से किसी का सहारा हैं।
बस एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी का सहारा हैं लेकिन प्राइवेट तो प्राइवेट हैं कब नौकरी छुट जाय पाता नहीं!
सच कहूं तो मेरे दिलों दिमाग़ में एक ही बात दिख रही थीं अपना एक घर हों। उसके अलावा आगे का कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था।
कैसे खरीदना हैं ज़मीन कितने की होगी? यह कुछ भी गणित में दिमाग़ में नहीं आया।
मेरे मन में बस एक ही बात चल रही थी वह हैं लोन! लोन तो हैं लोन से सब कुछ हो जायेगा।
लेकिन लोन भी लेने के लिए रूपयो की ज़रूरत पड़ती हैं। यह मुझे पता नहीं था। जब किसी मंज़िल में फसना हो तो सबसे पहले दोस्त ही फसाया करते हैं। ऐसा ही हुआ मेरे साथ। मैं जब भी किसी भी लोन जानकर के पास जाता तो लोन की प्रक्रिया बड़ी ही आसान लगती थी।
मेरे पास टोकन देने के लायक भी रुपया नहीं था। लेकिन जब भी लोन के सलाकार के पास जाता तो हिम्मत बड़ जाती थी।
3.मेरे पास जब जमीन लेने के लिए कुछ भी रुपया नहीं था तब मुझे सलाह दी गई कि मैं एक पर्सनल लोन ले लूं और मैने भी ऐसा ही किया पर्सनल लोन के लिए अप्लाई कर दिया। एक सप्ताह के अंदर मुझे पर्सनल लोन प्राप्त हो गया। इतने जल्दी पर्सनल लोन आना मेरे लिए ऐसा लगा जैसे की धीरे धीरे मेरे अपना घर का सपना साकार होते दिख रहा था।
आगे क्या कैसे होगा इन बातों से मैं काफी अंजान था। मुझे यह नहीं पता था कि आने वाला वक्त बुरा होगा या अच्छा। जो मुझे अच्छा लगा वो मैं करता गया।
4. आख़िर वह दिन आ गया एक छोटा – सा ज़मीन का टुकड़ा खरीद ही लिया।
आगे भविष्य के बारे में मुझे ज्ञान नहीं था जब कभी नौकरी करते रहो तो मन में एक लालच कहो या एक उम्मीद लगी होती हैं कि आने वाला वक्त तरकी या प्रमोशन और आगे बड़ेगी या बड़ेगा। परन्तु ऐसा कुछ हुआ नहीं।
बिना समझें बिना जानें मैने बहुत बड़ा लोन अपने जीवन में कर्ज़ लेकर अपने सपने देखने चला हूं। यह कदम मेरे लिए बहुत ही बड़ी परेशानी का कारण बन जायेगा यह सोचा नहीं था।
जब हर महीने सैलरी आती थी तो बहुत पैसा दिखता था। उस वक्त बहुत खुशी मिलती थी। किसी प्रकार का कर्ज़ नही था जीवन सुकून से कटती थी। जब से पर्सनल लोन और होम लोन की किश्त हर महीने अकाउंट से कट जाती हैं तो बैंक बैलेंस महीना होने के पहले ही खाली हों जाता हैं। तब घर के बाकी खर्च चलाना भी बड़ी मुश्किल हो जाती हैं।
कुछ जीवन में ऐसी गलतियां होती हैं जिन पर जीवन भर पछतावा के अलावा कुछ भी नहीं रहता हैं।
आगे की कहानी अगले पेज पर दोस्त.............
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