इस मनुष्यरूपी जीवन में इंसान ने इंसान की तरह जीवन जिना छोड़ दिया हैं।
इस भाग दौड़ की ज़िंदगी में इंसान अपने आप को भूल सा गया हैं।
इस भू लोग (पृथ्वी) पर जब वो आता होगा तो बहुत सारे वादे करके आता होगा! लेकिन जैसे ही इस धरती पर आगमन होने के बाद वह सारे वादे कसमें भूल कर इस मोह माया रूपी जीवन में मेरा मेरा करके धन के पीछे अपना सारा जीवन लगा देता हैं।
इंसान अपने जीवन काल में धन संपत्ति, धन दौलत एकत्रित करने में लग जाता हैं।
जब बुरे कर्म करके जो धन संपति कमाया रहता हैं वही धन संपति बुरे कर्मो को बचाने में लगा देता हैं।
जो धन दौलत बुरे कर्मो से कमाया हुआ होता हैं वह धन ना हीं बुरे वक्त में काम आता हैं, ना ही वह धन बचाव कर सकता हैं।
एक कहानी एक करिबी कि हैं जिसने अपने जीवन काल में धन दौलत और शोहरत सब हासिल किया। कड़ी मेहनत और लगन से वह बहुत बड़े मुकाम पर पहुंच चुका था।
उस इंसान को किसी भी वस्तु और किसी भी इंसान को खरीदा जा सकता हैं ऐसा वहम उसके दिमाग़ में और मन में जगह बन गई थीं। परंतु समय की मार और किस्मत में आगे क्या होने वाला हैं यह तो मात्र भगवान ही जानते हैं।
जब किसी इंसान को किसी चीज़ का घमंड चढ़ जाता हैं तो भगवान उस घमंड को चूर करने के लिए किस अवतार या किस रूप में अपनी लीला दिखाएंगे यह एक इंसान के समझ के बाहर हैं।
हर बुरा कर्म करने वाला इंसान बुरे कर्म करते समय उसे गलत नहीं लगता हैं, सब सही होने का ऐहसास लगता हैं।
जब वह अपने ही बनाए हुऐ जाल में जब उलझ जाता हैं तब उसे ऐसास होता हैं की कुछ तो मैंने गलत किया हैं।
जब उसे अपने कर्मो की सजा मिलने वाली रहती हैं तब उसे लगता हैं कि मैं बच जाऊंगा अपने धन संपति का प्रयोग करके!
धन संपति से किसी को भी खरीदा जा सकता हैं लेकिन जब वक्त बुरा चलने लगता हैं तो ना ही धन काम आता हैं ना हीं उसका रूदबा, सब धरा का धरा रह जाता हैं।
तभी एक कहावत हैं की जैसी करनी वैसी भरनी।
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