मेरी ज़िंदगी! आज इस लेख में मैं अपने वर्तमान चल रहा समय पर चर्चा करने जा रहा हूं।
एक प्राईवेट कंपनी में नौकरी करने वाला व्यक्ति अभी के हालातो में कैसे कैसे अपना घर के खर्चों को चला पा रहा हैं। स्वतः स्वयं ही जान सकता हैं।
प्राइवेट कंपनियों ने कर्मचारियों का वेतन और भत्ता में किसी भी प्रकार की बड़ोत्री नहीं की हैं।
जितनी सैलरी देरी से आती हैं! घर के खर्चे सबसे तेज़ रफ़्तार से बड़ने लगे हैं।
कम बजट में घर के खर्चे चलाना बड़ा मुस्किल हो गया है। दिमाग़ शून्य हों जाता हैं जब घर का बजट बिगड़ जाता हैं।
इस संसार में जो भी जीव प्राणी हैं वह अपनी जीविका चलाने के लिए कुछ ना कुछ प्रयास में लगा ही रहता हैं। इन्सान रूपी जीवन में अपना पेट भरने के लिए इंसान दिन रात कड़ी मेहनत करते रहता हैं। फिर भी इन्सान की संतुष्टि पूरी नहीं होती हैं।
एक नौकरी वो भी प्राईवेट कंपनी में जिसमें काम करने वाले कर्मचारियों के भविष्य का कोई अता पता नहीं?
कि कब उसे उस कंपनी से निकाल दे! एक ना एक दिन वो भी दिन आता ही हैं आपने जॉब से हाथ धोना पड़ता हैं।
जिस दिन कंपनी से निकलता हैं उसके बाद उस इंसान को बाहरी दुनिया में समझ ही नही आता कि अब नया काम कहा से सुरवात करें ना करें!
वजह सभी आप जानते हों जिस कंपनी को आपने अपने 10 से 12 साल दे दिए उसके बाद उस कंपनी ने आपको अपनी कंपनी से निकाल दिया तो अटपटा और झटपटाहट ज़रूर लगेगा। लाज़मी हैं ज़रूर लगेगा उसमें कोई संदेह नहीं।
किसी किसी के लिए बहुत ही दुःख भरा पल होता हैं तो किसी किसी के लिए एक नया सबक और नई उम्मीद मिल जाती हैं।
शायद किसी को उस पैकेज में नई नौकरी भी नही मिलती बड़ी चुनौतीयो का सामना करना पड़ जाता हैं।
किसी को पढ़ाई की फीस, बैंक लोन की ईएमआई, घर गृहस्थी का खर्चा ना जानें अंगिनित खर्चे लगे रहते हैं।
सभी को मेंटेन करना बहुत बड़ी समस्या हो जाती हैं।
जैसे इस पेट को भूख को मिटाने के लिए भोजन का बंदोबस करना पड़ता हैं उसी तरह जीवन को संतुलित पटरी पर चलाने के लिए हम सभी को किसी ना किसी प्रकार से किसी भी प्रकार के कार्य मे रुचि रख कर अपने और परिवार के लिए काम कि आवश्कता पड़ती हैं।
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