शुक्रिया...
आज जो मुझे यह जो प्लेटफॉर्म मिला हैं अपने जीवन कि कुछ यादें ताज़ा करने और उन्हें लिख कर बाया करने का ,मै कितना खुश हूं ये बता नहीं सकता।
मेरी ज़िंदगी में जो भी घटित घटनाए हुई हैं उसे लिखने के पहले या शुरवात करने से पहले...... मैं ब्लॉगर और गूगल का तहे दिल से शुक्रिया करना चाहता हूं।
मैं अपनी ज़िन्दगी कि कहानी की शुरुआत उस पल से कर रहा हूं जब से मुझे अच्छे से याद हैं...... मैं एक छोटे से गांव से और एक ग़रीब परिवार से तालुक रखता हूं।
वह दिन आज भी याद है जब मां अपनी पेट कि भूख को मारकर अपनी औलाद का पेट पहले भर्ती थीं, अगर कुछ बच गया तो ठीक नहीं तो खाली पेट ही पानी पीकर सो जाया करतीं थीं मेरी मां।
वो भी क्या दिन थे एक एक दाने के लिए मोहताज रहते थे। ना ठीक से पहनें को कोई कपड़ा था, ना ही कोई ठीक से सोने के लिए बिस्तर।
बड़े ही दर्द भरे दिन थे वो!
आज जो मुझे यह जो प्लेटफॉर्म मिला हैं अपने जीवन कि कुछ यादें ताज़ा करने और उन्हें लिख कर बाया करने का ,मै कितना खुश हूं ये बता नहीं सकता।
मेरी ज़िंदगी में जो भी घटित घटनाए हुई हैं उसे लिखने के पहले या शुरवात करने से पहले...... मैं ब्लॉगर और गूगल का तहे दिल से शुक्रिया करना चाहता हूं।
मैं अपनी ज़िन्दगी कि कहानी की शुरुआत उस पल से कर रहा हूं जब से मुझे अच्छे से याद हैं...... मैं एक छोटे से गांव से और एक ग़रीब परिवार से तालुक रखता हूं।
वह दिन आज भी याद है जब मां अपनी पेट कि भूख को मारकर अपनी औलाद का पेट पहले भर्ती थीं, अगर कुछ बच गया तो ठीक नहीं तो खाली पेट ही पानी पीकर सो जाया करतीं थीं मेरी मां।
वो भी क्या दिन थे एक एक दाने के लिए मोहताज रहते थे। ना ठीक से पहनें को कोई कपड़ा था, ना ही कोई ठीक से सोने के लिए बिस्तर।
बड़े ही दर्द भरे दिन थे वो!
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