एक हादसा ज़िंदगी का!
मैं एक घटना का जिक्र करूंगा , जब भी मैं उस घटना के बारे में सोचता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
मैं सोलर फिल्ड के सिलसिले में एक गांव गया था। उसी गांव में एक घर किराया पर ले रखा था। बरसात का ही महीना था। श्याम के वक्त जब मैं फिल्ड से रूम आकर फ्रेश होकर खाना खाकर, सोने के लिए अपने बिस्तर पर लेट गया।
मेरा बिस्तर बेड जमीन पर ही नीचे बिछाया था। कुछ देर बाद मुझे नींद लग गई। शायद उस समय रात के 12:00 से 12:30 बजे रहे होंगे। मैं बहुत ही गहरी नींद में सो रहा था कि तभी अचानक से मुझे ठंड का एहसास हुआ।
मेरे रूम की लाईट हल्की रोशनी थीं जब मैं देखा कि एक साप मेरे गले से होकर सीने से होकर धीरे धीरे हलचल करते हुए जा रहा था। थोड़ी देर के लिए तो मानों मेरी सासे ही रुक गई और मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
जब साप मेरे शरीर से होकर बाहर निकल आया तो मैं झट से खड़ा होकर अपने रूम की लाईट ज्यादा रोशनी का चालू किया और मैं देखा जब उस साप को तो वह बहुत ही ज़हरीला साप था।
जिसे गांव की भाषा में बुंदकी बंदकी वाला साप के नाम से जानते हैं।
मैं उस रात ठीक से सो नहीं पाया और बार बार एक हि बात मन में आ रही थी अगर साप काट देता तो क्या होता!
मैं उस रात भगवान शिव को बार बार सुक्रिया कर रहा था कि मुझे एक नई ज़िंदगी दी।
मैं उस रात भगवान शिव को बार बार सुक्रिया कर रहा था कि मुझे एक नई ज़िंदगी दी।
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