मेरी अपनी ज़िंदगी!
नमस्कार दोस्तों!
आज इस पोस्ट मैं अपनी जिंदगी के बारे में अपने विचार व्यक्त कर रहा हूं।
कभी कभी मन में जो विचार आते हैं अगर वही कर बैठा तो क्या होगा मेरा।?
मेरी ज़िन्दगी में जो हालत बने हैं और जो कुछ भी मेरी ज़िन्दगी में चल रहा हैं उन हालातों को कैसे कैसे सुलझाते सुलझाते मैं स्वयं उलझ जाता हूं। मेरी ज़िन्दगी में जो परेशानियां चल रहीं हैं वैसी परेशानियां किसी के भी ज़िंदगी मे ना आए।
मैं अपनी ज़िंदगी की परेशानियों को कैसे और कहां से बताना शुरू करू मुझे समझ ही नहीं आ रहा हैं।
हर किसी के जीवन में सभी के बहुत बड़े बड़े सपने होते हैं किसी के सपने साकार तो किसी के सपने ही बन कर रह जाते हैं।
मेरे भी अपने सपने थे ओर हैं, कुछ सपनों को मैंने साकार भी किया। लेकिन कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बहुत बड़ी मुसीबत या समस्या मेरे जिंदगी में इंतज़ार कर रही होगी?
जैसे तैसे अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने कि मंज़िल की और अग्रसर था । धीरे धीरे उस मंजिल में मुझे आशाओं कि किरण देखने लगी थी, कि मैं भी कुछ कर सकता हूं परंतु अब उम्मीद टूटने और बिखरने की ओर नज़र आ रहा हैं।
मेरे जीवन में हर मोड़ पर एक परीक्षा की घड़ी होती हैं।
मैं अपनी जॉब से संतुष्ट था जैसे भी हो फिल्ड जॉब जरूर हैं लेकिन इसी जॉब से परिवार कि सारी खुशी तो नहीं बोल सकता परंतु कुछ खुशियां पूरी कर लेता हूं।
मैंने अपना पूरा मन बना लिया था कि जॉब ना करू? अपना ही कुछ छोटा मोटा काम धंधा शुरू करू! लेकिन अब तो जॉब मजबूरी में करना ही होगा।
जब किसी कि ज़िंदगी किसी प्रकार का रोग या बीमारी के चपेट में आ जाए तो उस रोग के इलाज़ के लिए रुपयों का बहुत बड़ा योगदान रह जाता हैं।
बुरे वक्त ना ही अपने और पराए काम आते हैं बस पैसा ही काम आता हैं। बीमारी का इलाज़ बिना पैसों का संभव ही नहीं।
मेरे जिंदगी में अब जॉब में आंसू निकले या आंखो में से खून आए, जॉब कैसी भी हो करनी पड़ेगी।
अब मैं इतना मजबूर और बेबस हो गया हूं कि मुझे जीने का मन ही नहीं होता।
फिल्ड कि जॉब होने की वजह से ना ही ठीक से अपनी पत्नी का इलाज़ बढ़िया से हॉस्पिटल में भी नहीं कर सकता। ना ही ठीक से उसके साथ समय बीता सकता। अगर इमोशनल अटैच मे जॉब छोड़ दू तो ना मैं घर का रहूंगा ना ही घाट का।
तकलीफ जितनी मेरे पत्नी को बीमारी कि हैं उससे ज्यादा तकलीफ़ मुझे अपने आप से हैं। चिंता से शायद मैं ही ना मर जाऊ कहीं।
मुझे उन रास्तों कि तलाश हैं जिन रास्तों में उम्मीद टिक्की हैं और वह हैं सिर्फ परमात्मा (god)
जो हो रहा हैं होने दो, जो होगा हो के रहेगा, बस मेरा काम हैं अपना कार्य और कर्तव्य ईमानदारी से करते रहना।

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